Description
मूंगा अंगूठी एक लोकप्रिय रत्न है, जिसे अक्सर अंगूठी के रूप में पहना जाता है। इसे समुद्र से प्राप्त प्राकृतिक मूंगा (कोरल) से बनाया जाता है और इसे हिन्दू ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है। मूंगा अंगूठी के प्रमुख लाभ और उपयोग इस प्रकार हैं:
मूंगा अंगूठी के लाभ:
- मंगल की कृपा: मूंगा अंगूठी मंगल ग्रह से संबंधित होती है। इसे पहनने से मंगल की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, जो व्यक्ति के जीवन में उत्साह और साहस बढ़ाती है।
- स्वास्थ्य लाभ: मूंगा रक्त संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है और शारीरिक ऊर्जा को बढ़ावा देता है।
- भावनात्मक संतुलन: यह मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने में सहायक होता है, जिससे व्यक्ति अधिक स्थिर और संतुलित महसूस करता है।
- व्यवसाय में सफलता: इसे व्यवसाय में सफलता और समृद्धि लाने के लिए भी पहना जाता है।
मूंगा अंगूठी पहनने की विधि:
- किसी शुभ दिन: मूंगा अंगूठी को सोमवार या मंगलवार को पहनना सबसे अच्छा माना जाता है।
- धातु: इसे सोने, चांदी या तांबे में सेट किया जा सकता है।
- मंत्र जाप: अंगूठी पहनने से पहले “ॐ अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ रहता है।
मूंगा रत्न को अंग्रेज़ी में कोरल कहते हैं. यह समुद्र की गहराई में पाया जाने वाला एक रत्न है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यह मंगल ग्रह का रत्न है. मूंगा रत्न से जुड़ी कुछ खास बातेंः
- मूंगा रत्न लाल, सिंदूरी, गेरुआ, और सफ़ेद रंग का होता है.
- यह एक तरह की लकड़ी होती है और बेहद चिकनी होती है.
- मूंगा रत्न को सोना, चांदी, या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर पहना जाता है.
- रत्न विद्या के मुताबिक, कम से कम 7 से सवा सात रत्ती का मूंगा रत्न पहनना चाहिए.
- मूंगा रत्न को मंगलवार के दिन सुबह से दोपहर के बीच दाएं हाथ की अनामिका उंगली में पहनना चाहिए.
- स्त्रियां अगर बाएं हाथ की अनामिका उंगली में मूंगा पहनें, तो उन्हें बेहतर परिणाम मिलते हैं.
- मूंगा रत्न को पहनने से पहले कच्चे दूध और गंगाजल से अच्छी तरह धो लेना चाहिए.
- असली मूंगे पर पानी की बूंदे ठहर जाती हैं, जबकि नकली मूंगे पर बूंदें नहीं ठहरतीं.





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