Description
4 Mukhi Rudraksha विशेष रूप से ज्ञान, शिक्षा, और मानसिक विकास के लिए लाभकारी माना जाता है। यह रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा के प्रतीक के रूप में पूजित होता है, जो ब्रह्मा जी के सृजनात्मक गुणों का प्रतीक है। 4 मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति को ज्ञान, समझ और बुद्धिमत्ता में वृद्धि करता है, जिससे उसका जीवन सरल और सफल होता है। यह रुद्राक्ष शारीरिक और मानसिक शांति के लिए भी लाभकारी है।
4 मुखी रुद्राक्ष का महत्व:
- भगवान ब्रह्मा का प्रतीक: 4 मुखी रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए पूजित होता है, जो सृजन और ज्ञान के देवता हैं।
- ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: यह रुद्राक्ष व्यक्ति की मानसिक क्षमता, ज्ञान और बुद्धि को बढ़ाता है।
- शारीरिक और मानसिक शांति: यह रुद्राक्ष शांति, संतुलन और समृद्धि लाने में मदद करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: 4 मुखी रुद्राक्ष से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
4 मुखी रुद्राक्ष की पूजा विधि:
- स्वच्छ स्थान का चयन: सबसे पहले पूजा के लिए एक स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें। इस स्थान पर सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर रुद्राक्ष रखें।
- रुद्राक्ष की शुद्धि: रुद्राक्ष को शुद्ध करने के लिए गंगाजल या शुद्ध जल से धो लें। इससे रुद्राक्ष पवित्र हो जाएगा और इसका प्रभाव सकारात्मक रहेगा।
- दीपक और अगरबत्ती जलाएं: पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती (धूप) लगाएं, जिससे वातावरण शुद्ध हो और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
- रुद्राक्ष पर ताजे फूल अर्पित करें: रुद्राक्ष पर ताजे फूल अर्पित करें। फूल भगवान ब्रह्मा और रुद्राक्ष को समर्पित होते हैं। इससे रुद्राक्ष को पवित्र और शुद्ध किया जाता है।
- मंत्र जाप करें: 4 मुखी रुद्राक्ष की पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें:
- “ॐ ह्लीं ह्लीं ब्रह्मणे नमः” – यह मंत्र 4 मुखी रुद्राक्ष के लिए खास माना जाता है।
- “ॐ नमः शिवाय” – यह मंत्र भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए उपयोगी है।
इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। अगर आप माला का उपयोग कर रहे हैं तो माला पर एक-एक मंत्र का जाप करें।
- चावल और लौंग अर्पित करें: रुद्राक्ष के सामने चावल और लौंग अर्पित करें। यह भगवान ब्रह्मा के प्रति सम्मान और भोग अर्पित करने का तरीका है।
- फल और मिठाई अर्पित करें: पूजा के बाद रुद्राक्ष के सामने ताजे फल और मिठाई अर्पित करें। यह भोग के रूप में भगवान को अर्पित किया जाता है और आपकी श्रद्धा को दर्शाता है।
- आरती और शांति पाठ: पूजा के बाद भगवान शिव या ब्रह्मा की आरती “ॐ जय शिव ओंकारा” या “ब्रह्मा जी की आरती” का पाठ करें। इसके बाद “ॐ शांति शांति शांति” का जाप करें, ताकि वातावरण में शांति बनी रहे।
- रुद्राक्ष को धारण करें: पूजा समाप्त होने के बाद रुद्राक्ष को शुद्ध करके पहन सकते हैं। आप इसे अपने गले में चांदी या सोने की डोरी में पहन सकते हैं, या इसे अंगूठी के रूप में भी धारण कर सकते हैं।
- प्रसाद वितरण: अंत में पूजा का प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों में वितरित करें।
विशेष ध्यान देने योग्य बातें:
- रुद्राक्ष को हमेशा साफ और पवित्र रखें। स्नान और भोजन के समय इसे हटा लें।
- पूजा करते समय मानसिक शांति बनाए रखें और पूरी श्रद्धा से रुद्राक्ष की पूजा करें।
- रुद्राक्ष को नियमित रूप से शुद्ध करें और पूजा विधि का पालन करें।
4 मुखी रुद्राक्ष के लाभ:
- ज्ञान और शिक्षा में वृद्धि: यह रुद्राक्ष शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है और बुद्धि को तेज करता है।
- मानसिक शांति: 4 मुखी रुद्राक्ष मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह रुद्राक्ष आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है और व्यक्ति को आत्मज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: यह रुद्राक्ष सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और नकारात्मकता को समाप्त करता है।
- धार्मिक कार्यों में सफलता: यह रुद्राक्ष पूजा और धार्मिक कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए लाभकारी है।
इस प्रकार, 4 मुखी रुद्राक्ष की पूजा विधि से आप जीवन में ज्ञान, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।





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